तुम्हारे पास आना चाहता हूँ
अपनी बाहों में भर लेना चाहता हूँ
शब्द रहित कुछ कह चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
तुम्हे पा लेना चाहता हूँ
जीवन की डोर में समां लेना चाहता हूँ
तुम्हे अपना बना लेना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
तुमसे सिमट कर अपनी रूह को पनाह देना चाहता हूँ
तुम्हे खुद में छुपा लेना चाहता हूँ
तुम में ही अपनी छोटी सी दुनिया बसा लेना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
तेरे सपनो को साकार बना देना चाहता हूँ
निह्शांत मन को तृष्णा दिलदेना चाहता हूँ
आशाओं की नयी भाषा रचा देना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
तुम्हे भगवन से भी ऊपर बिठा देना चाहता हूँ
तेरी पूजा में खुद को लुटा देना चाहता हूँ
समर्पण को सृजन से झुका देना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
अपने जीवन का हर एक पल देना चाहता हूँ
तेरी झोली को खुशियों से भर देना चाहता हूँ
प्रबल अपने तक़दीर को बदल देना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
तेरा साथ न छोरु कभी ऐसा एक प्रण लेना चाहता हूँ
जीवन की रिक्ति को भर लेना चाहता हूँ
तेरे साथ जीने को कई जन्म लेना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
उलझनों से मुक्त करा सेना चाहता हूँ
आज़ादी की भावना जगा देना चाहता हूँ
सबों से तुम्हे चुरा लेना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
शासक तुम्हे बना देना चाहता हूँ
सबकी हित चढ़ा देना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
तुम्हे ना चाहे उन्हें सजा देना चाहता हूँ
तेरे हित में खुद को मिटा देना चाहता हूँ
अस्थियों को तुझसे अर्पण करा देना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
धन्य मैं खुद को बना लेना चाहता हूँ
जन्मों का साथी कहा लेना चाहता हूँ
इन सब उमीदों में नहीं, सच में जी लेना चाहता हूँ
पर पता नहीं कैसे?
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