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Thursday, August 12, 2010

CHAAHAT

कुछ नहीं मेरा सब कुछ तेरी एक  हसी के आगे
चाहूँगा तुम्हे हर एक सदी के आगे
है कवित पर सच हैं  कामनाएं मिट नहीं सकती
समर्पण के बोझ तलें इक्षाएं झुक नहीं सकती
जो अब न कहा तो कह ना सकूँगा
तुझसे जुदा होकर रह न सकूँगा
सोचा न था इतना चाहूँगा तुझे
कवी अपो में व् गिन पायूँगा तुझे
अब दर लगता है तुझे देखे बिना मर न जाऊ कहीं
तेरी यादो के साए में खो ना जाऊ कही
तेरी हसी ही दुआ है मेरी खुदा के आगे
कुछ नहीं मेरा सब कुछ तेरी एक हसी के आगे

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