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Monday, December 5, 2016

झिल मिल सी याद 


झिल  मिल सी याद से 
झरोखे हैं कुछ 
सजाये संग तेरे 
बरसो पहले 
लगता जैसे कल ही की तोह बात है 


धड़कन की दस्तक 
तेरी बाहों में महसूस की थी 
कानो में मेरे आज फिर वही साज़ है 
लगता है जैसे कल ही की तोह बात है 


सपनो में तेरा आना 
नींदे चुराना 
अंधेरे रात में पल दो पल का साथ निभाना 
धुंधली सी एक याद है 
लगता जैसे कल ही की तोह बात है 


छोटी छोटी बातों में रूठ जाना 
भोली सी बात पर मुस्कुराना 
बेबुनियाद गुस्से को मीठी बातों से भगाना 
बीते पल की ये याद हैं 
पर ना जाने क्यों लगता है
 जैसे कल ही की तोह बात हैं.. 

2 comments:

  1. अति सुंदर पंक्तियाँ ।
    मानो आपने कलम की स्याही से मेरे दिल की तस्वीर खींच दी हो।

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