झिल मिल सी याद
झिल मिल सी याद से
झरोखे हैं कुछ
सजाये संग तेरे
बरसो पहले
लगता जैसे कल ही की तोह बात है
धड़कन की दस्तक
तेरी बाहों में महसूस की थी
कानो में मेरे आज फिर वही साज़ है
लगता है जैसे कल ही की तोह बात है
सपनो में तेरा आना
नींदे चुराना
अंधेरे रात में पल दो पल का साथ निभाना
धुंधली सी एक याद है
लगता जैसे कल ही की तोह बात है
छोटी छोटी बातों में रूठ जाना
भोली सी बात पर मुस्कुराना
बेबुनियाद गुस्से को मीठी बातों से भगाना
बीते पल की ये याद हैं
पर ना जाने क्यों लगता है
जैसे कल ही की तोह बात हैं..

अति सुंदर पंक्तियाँ ।
ReplyDeleteमानो आपने कलम की स्याही से मेरे दिल की तस्वीर खींच दी हो।
Thnx Sriprakash..
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