"दूर हुए सब "
एक एक करके सब दूर हुए
कुछ इस तरह हम मजबूर हुए
ना जाने क्या गुनाह था हमारा
सपने भी सारे चूर हुए
पल पल धड़कन फिर चुपके से
याद तेरी ले आती है
तोड़ कर फिर बंधन सारे
ये आँखें नम हो जाती है
सीने में अब भी एक आस है
कोई और हो कितना भी करीब
पर फिर भी तू मेरे लिए ख़ास है
माना नहीं तू किस्मत में अब
पर यादें तोह अब भी मेरे पास है..

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