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Wednesday, February 2, 2011

DISHA..


बातों से मतलब नहीं सरता है
कुछ कर के दिखाना पड़ता  है
है जोशे बाजू तो कर्मठ बन
गंभीर होकर सबसे आगे तन
रख अपने पर यकीन की तुम कर सकती हो
बरबस होकर भी ज़माने से लार सकते हो 
किसने कहा तुझसे की तू कमजोर है 
मैं कहता हूँ की तेरे गुण का न कोई छोर  है 
कदम बस आगे बढ़ाना है 
क्यूंकि शिखर तक तुझको जाना है
आगे बढ़ते चलो वोही तेरी डगर है 
कुछ पाने का होर यही जीवन का सफ़र है 
मुर कर क्यूँ देखते हो अतीत को 
अतीत में गुजरा संसार है 
वर्तमान में ही आगे कर द्वार है 
अन्धकार में मत देखो भटक जाओगे
रोशिनी से चमक पाना सिख जाओगे
 बड़ते चलो जीवें यापन का सही श्रोत पाओगे. 

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