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Sunday, July 14, 2013

EHSAAS

दिल में लगी आग को बुझाओं तो कैसे ?
अपने  एहसास को बताऊ तो कैसे ?
मैं  कहता हु तो कुछ और समझ लेते हो 
मुझसे ज्यादा दुसरो का इकरार कर लेते हो 
भरोसा न था तो दिल क्यूँ लगा लिया डरकर खुद को क्यूँ सजा दिया 
कुछ बनकर आऊंगा लेने तुझे 
बस कुछ पल याद कर लेना मुझे 
मैं औरो की तरह झूठा नहीं 
अपने वादे पर अडिग हूँ दिल का खोटा नहीं 
जब तक लौट कर ना आओ मैं 
दिल में एहसास की दौलत को दबा कर रखना 
जलते रिश्ते को एहसास को समां से जला कर रखना 
दिल में लगी आग बूझ जाएगी जिस दिन 
अपने जज्बात को बयां कर जाऊंगा उस दिन 
तू मेरी साँसों में बस चुकी है 
चाहे तो इसे रोक देना 
पर मेरे मरने से पहले मुझसे इनकार न करना 
मिल  जब जायेंगे एक नया इतिहास बनायेंगे 
प्यार के पन्नो पर अमर प्रेम प्रसंग रच जायेंगे ..

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